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महाराज जी अक्सर कहते हैं कि इंसान वैसा ही बनता है जैसी उसकी सोहबत होती है। गलत दोस्तों या नकारात्मक लोगों के साथ रहने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, जो अंततः पतन का कारण बनती है।
5. लक्ष्यहीनता और आलस्य (Laziness)
जीवन तब बर्बाद होने लगता है जब हम अपनी संस्कृति और माता-पिता द्वारा दिए गए संस्कारों को भूल जाते हैं। अनुशासनहीन जीवन और बड़ों का अनादर व्यक्ति को सही रास्ते से भटका देता है। 3. नशा और व्यसन (Addictions)
जब व्यक्ति के भीतर 'मैं' का भाव आ जाता है और वह खुद को सबसे ऊपर समझने लगता है, तो उसका पतन निश्चित है। अहंकार इंसान को सीखने और सुधरने से रोकता है।